राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में बेटियां.....

घर की शोभा बेटियाँ, दो दो कुल की लाज !
सबको होना चाहिए, इसी बात पर नाज !!
छोड़ रही हर क्षेत्र में, आज बेटियां अमिट छाप !
नहीं किसी से कम बेटियां, मान भी लो ये आप  !!

क्यों ना उन्नत शीश हो, क्यों ना होवे नाम !
कर जायें जब बेटियाँ, बेटों वाले काम तमाम !!

उत्तरदायी कौन है, कौन है जिम्मेदार ? किसकी है ये भूल !
सिमटी हैं कलियाँ अगर, खिले नहीं हैं फूल !!

संकीर्ण सोच सा जहर घुलता जाये नित अगर !
बढ़ता जाये लिंगानुपात का घटता असर और कहर !!

आओ मिलकर कहें हम सब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ 
मान बढ़ाओ, शान बढ़ाओ,  बेटी संग उत्सव मनाओ !!
  
जन्मोत्सव से करें शुरुआत , पौधारोपण  बेटी के नाम !
घर, दुकान, दीवार, चौराहे  नामित हो बेटी के नाम !!
   
बेटे समान बेटियां गौरवान्वित हों , पोषित हों !
समान अवसर पाकर वे पल्लवित हों साकार हों !!

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